अब किसी भी बात पर खुलती नहीं हैं खिड़कियां!

आज शहरयार जी की एक गज़ल के बहाने आज के हालात पर चर्चा कर लेते हैं। इससे पहले दुष्यंत जी के एक शेर को एक बार फिर याद कर लेता हूँ-       इस शहर में वो कोई बारात […]

Our world and the evil forces!

Long back I had given an example from famous science fiction by H.G.Wells – The Island of Dr. Moreau, in an essay written by me for some competitive exam. In that novel the writer had woven a story according to […]

मेरा नाम क्या है जी!

आज बाकी बातें छोड़कर, देश के एक प्रमुख बैंक के साथ हुए अनुभव के बारे में बात कर लेते हैं। आईसीआईसीआई देश का एक प्रमुख प्राइवेट बैंक है और मेरे मन में अक्सर इनकी सेवाओं को लेकर संतुष्टि का भाव […]

तू भी हुआ रखैल — बदरा पानी दे !

जब स्व. रमेश रंजक जी के दो गीत पहले शेयर किए तो खयाल आया कि गरीब किसान की हालत को लेकर बादल से फरियाद वाला उनका गीत भी शेयर करूं। गरीब किसान का पूरा भविष्य, उसकी खेती पर और उसकी […]

तीस दिन में एक मुट्ठी दाम याद आए!

पिछली बार मैंने स्व. रमेश रंजक जी का एक प्रेम गीत, शेयर किया था, आज उनका एक गीत जो जुझारूपन का, आम आदमी की बेचारगी का, बड़ी सरल भाषा में सजीव चित्रण करता है, कैसे एक आम इंसान के दिन […]

भर-भर आई आँख , ब्याज से पाँच-पचास हुए!

आज मैं अपने प्रिय कवियों में से एक, स्व. रमेश रंजक जी का एक प्यारा सा गीत, बिना किसी भूमिका के शेयर करूंगा।   जितने दूर हुए तुम हमसे उतने पास हुए, दर्द गीत बन गया जिस घड़ी प्राण उदास […]

The Fittest Survive!

There was a time when our forefathers lived in jungles, as we are told. In jungles there is the law of the land, which tells that the powerful species survive. We hear about species which existed in the world earlier […]

दिल्ली चुनाव- मुफ्त में भाजी, मुफ्त में खाजा!

आज अपनी दिल्ली को याद करने का मन हो रहा, जहाँ मेरा बचपन बीता और जहाँ मैंने शुरू की कुछ नौकरियां की थीं। मेरा जन्म वहाँ 1950 में हुआ था, जब आज़ादी के बाद दिल्ली बस रही थी, चारदीवारी वाली […]

Sunshine Blogger Award!

    Dear fellow bloggers and friends.  I am very happy to inform you all that once again I have been nominated, among other bloggers, by the same blogger friend. I am very much thankful to him.  This time it […]

Justice for all!

Today again discussing on an IndiSpire prompt. Question is whether law is lenient towards the rich and powerful.     We have seen examples in society and as reflected in fiction, films etc. When somebody goes for a pilgrimage, taking […]

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