यह श्वान – रवींद्रनाथ ठाकुर

आज मैं भारत के नोबल पुरस्कार विजेता तथा हमारे राष्ट्रगान के रचयिता कवि- गुरुदेव रवींद्र नाथ ठाकुर की एक कविता का अनुवाद प्रस्तुत कर रहा हूँ। यह उनकी अंग्रेजी भाषा में प्रकाशित एक कविता का भावानुवाद है। लीजिए पहले प्रस्तुत […]

वक़्त ने ऐसा गीत क्यों गाया!

आज जगजीत सिंह जी की गाई हुई एक बहुत सुंदर गज़ल याद आ रही है। इसे 1982 में रिलीज़ हुई फिल्म- ‘साथ साथ’ के लिए के कुलदीप सिंह जी के संगीत निर्देशन में तैयार किया गया था। इस गज़ल के […]

Creativity, Power and Values!

Again I am submitting my views based on a weekly prompt, which is- ‘When power declines, culture flourishes… do you agree?’ I just remember the example of Ravana, whom we remember as a Demon King! He was a greatly learned […]

कहाँ है कवि ?

आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि जॉन कीट्स की अंग्रेजी भाषा में लिखी गई एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल अंग्रेजी कविता प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया […]

39. पर दिलों पर हुक़ूमत हमारी रही!

चलिए आज फिर से यादों की पुरानी संदूकची खोलते हैं, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! लगभग ढाई वर्ष के लखनऊ प्रवास और सात वर्ष के ऊंचाहार प्रवास की कुछ छिटपुट घटनाएं याद करने का प्रयास करता हूँ। एक […]

अरे एकांत! अगर मुझे तुम्हारे साथ ही रहना है तो!

आज भी मैं विख्यात अंग्रेजी कवि जॉन कीट्स की अंग्रेजी भाषा में लिखी गई एक और कविता का भावानुवाद और उसके बाद मूल अंग्रेजी कविता प्रस्तुत करने का प्रयास करूंगा। आज के लिए पहले प्रस्तुत है मेरे द्वारा किया गया […]

Good Writing, How to do that?

Again writing based on the weekly prompt on #IndiSpire. The prompt this time also appears to be quite strange. Let me mention it in the very beginning. The prompt is-  ‘Is leaving the social media the right step for those […]

Walking through the evening!

Again it is time to write on the basis of weekly prompt. Naturally I would mention the details of the prompt, but in the beginning I am remembering a programme that is shown on Baby TV, for little babies, growing […]

38. यह पूजन अपनी संस्कृति का, ये अर्चन अपनी भाषा का।

पुराने पन्ने पलटते हुए, एक क़दम और आगे बढ़ते हैं।जीवन यात्रा का एक और पड़ाव, लीजिए प्रस्तुत है एक और पुराना ब्लॉग! एक बात में मुझे शुरू से कहीं कोई संदेह नहीं रहा कि राजभाषा नीति के अनुपालन की पूरी […]

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